
जो स्पष्टता आज है यदि पहले जैसी होती तो आज भी उन लोगों को इज्जत देती जो इज्जत के लायक नहीं ! उमर का बड़ा होना ही सबसे बड़ी बात नहीं होती ! बड़े है ज्यादा अनुभव होगा यही बात सुनने को मिलती है! उम्र का बड़ा होना और अनुभव से यह नहीं सिद्ध होता कि वो इज्जत के लायक है! और हां जहां स्वार्थ होता है वहीं आंखे बंद होती है या जान बुझ कर करि जाती है! इज्जत नहीं देंगे तो स्वार्थ कैसे पूरा होगा फिर!
















