
alpa parmar
mene kabhi try hi nai kari ki problem ko jud kaha hai problem dekhte hi mera thinking process stop ho jata hai and turant hi react karti hu
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mene kabhi try hi nai kari ki problem ko jud kaha hai problem dekhte hi mera thinking process stop ho jata hai and turant hi react karti hu

अल्पा जी, आपने ही लिखा, समस्या दिखते ही सोचने का तरीका रुक जाता है और तुरंत रिएक्ट होने लगता है। गौर करने वाली बात यह है कि यह रुकना कोई कमज़ोरी नहीं, एक निकास है, उलझना नहीं पड़ता, झट से किया हुआ काम, किया हुआ लगने लगता है। सवाल यह नहीं कि सोचना कैसे आएगा, सवाल यह है कि रिएक्शन इतना आरामदायक क्यों लगता है कि रुकने की नौबत ही नहीं आती। अगली बार जब कोई समस्या सामने आए, वहीं पहला पल पकड़ने लायक है, वह पल जहां सोचने से पहले ही जवाब तैयार हो चुका होता है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401