✍🏻 पोस्ट 12 | 23 सितंबर '26💭 विषय — विश्व दर्शन────────────“मनुष्य स्वतंत्र पैदा होता है, लेकिन हर जगह जंजीरों में जकड़ा हुआ है।”
🪞 रूसो का यह कथन हमें एक महत्वपूर्ण सवाल की ओर ले जाता है, क्या मनुष्य सच में स्वतंत्र है, या उसकी इच्छाएँ, पसंद और प्रतिक्रियाएँ पहले से बनी हुई धारणाओं से संचालित होती हैं?
हम अक्सर सोचते हैं कि अगर परिस्थितियाँ बदल जाएँ, लोग हमें स्वीकार करने लगें, पैसा मिल जाए या अपनी पसंद के अनुसार जीने की पूरी छूट…
C and D .
It will tell us what we're and why we are choosing something.
And after we start to understand the obsession to choose an option will reduce.
Jamna kataria
हम पूरी उम्र यही चाहते हैं कि आज़ाद हो जाएं, पर वास्तव में खुद ही खुद के लिए ज़ंजीर का चुनाव करते हैं। यह क्रिया हर रोज़ चलती है। कभी ये ज़ंजीर परिवार की, कभी पैसे की या प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई रहती है।
Varsha
c
Smita
c
Sharmistha
Many times we choose things to keep everyone around us happy. It is not forced decision but we somehow choose it , may be because of our conditioning or because we are compassionate about others. Is that a correct way to do things or not. If it's not then what should we do?
1
Tarni Kumari
C
Devshankar
A) हर इच्छा पूरी होना ही स्वतंत्रता है। — ❌ नहीं
इच्छा पूरी होना स्वतंत्रता नहीं, बल्कि इच्छा की पूर्ति है। यदि मन किसी इच्छा के पीछे बंधा हुआ है, तो इच्छा पूरी होने के बाद भी दूसरी इच्छा पैदा हो सकती है।
B) हर सीमा तोड़ देना ही स्वतंत्रता है। — ❌ नहीं
बाहरी सीमाएँ तोड़ देना पर्याप्त नहीं। यदि भीतर भय, लालच, पहचान या सामाजिक स्वीकृति की गुलामी बनी हुई है, तो बाहरी स्वतंत्रता के बावजूद व्यक्ति भीतर से बंधा हुआ है।
C) अपनी कंडीशनिंग को देखकर चुनाव को समझना। — ✅ सबसे गहरा उत्तर
यही पोस्ट का केंद्रीय बिंदु है। जब व्यक्ति देखता है कि उसकी पसंद, नापसंद, इच्छाएँ और प्रतिक्रियाएँ किन धारणाओं और conditioning से बन रही हैं, तभी वह अपने चुनाव को समझना शुरू करता है। समझ के बिना चुनाव केवल प्रतिक्रिया भी हो सकता है।
D) स्वीकृति की आवश्यकता से मुक्त होना। — ✅ महत्वपूर्ण, लेकिन C से अधिक विशिष्ट
दूसरों की स्वीकृति की भूख एक गहरा बंधन है। उससे मुक्त होना स्वतंत्रता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन पोस्ट केवल स्वीकृति की बात नहीं करती; इसमें इच्छा, भय, पहचान और conditioning सभी शामिल हैं।
“स्वतंत्रता अधिक विकल्प होने में नहीं, बल्कि यह देखने में है कि विकल्प चुनने वाले मन को कौन चला रहा है।”
Snehasish Sarjan
C
Ladli Kumari
c
Minakshi singh
It’s option C.
Sabina rana
C
Kashish
C
Premlata
C, अपनी कंडीशनिंग को देखकर चुनाव को समझना।
Ar P
D
Nitish pandey
B C D
Mamta Kumari
D
Pratima
C,D
VIkas Bhiungade
D
Pratima Bala Kar
C, D
Chawda Vaishali
D
Rajni
D
Mannu Rani
b
Abhishek Sharma
c and d
Rekha Shewale
C & D
Laxmi Bai Yadav
C
Priyanka Verma
c
Aditya Barahate
c,d
REEMA SHARMA
c
Aman Sharma
c और d
✍🏻 पोस्ट 12 | 23 सितंबर '26 💭 विषय — विश्व दर्शन ──────────── “मनुष्य स्वतंत्र पैदा होता…