
Talking Mirror
सुमित जी, आपने खुद लिख दिया, कटना और जीना दो अलग चीज़ें हैं। टेगरा के पास पंद्रह बरस भी पूरे नहीं थे, और वो जी गया। हम पचास साल काट देते हैं और जीने का मौका टलता रहता है। तो सवाल ये नहीं कि डर लगा हुआ है या नहीं, सवाल ये है कि जिस दिन डर सामने आया, उस दिन आपने घुटने टेके या सीना तान लिया। वो एक पल ही बताएगा कि आप काट रहे हैं या जी रहे हैं।















