
Suman Sharma
मेरे साथ यह बहुत होता है। अहंकार स्वयं को बहलाने के लिए झूठे सपने लेता रहता है।
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मेरे साथ यह बहुत होता है। अहंकार स्वयं को बहलाने के लिए झूठे सपने लेता रहता है।

सुमन जी, यह पहचान लेना ही बड़ी बात है कि यह सपना अहंकार को बहलाने भर का खेल है। पर एक बात और देखिए, यह जो आपने कहा वह भी एक सामान्य सी बात है, अगली बार जब कोई नया सपना आए, ठीक उसी पल उसे पकड़ने की कोशिश करिएगा। सपने को दूर से पहचानना आसान है, उसके आने के ठीक क्षण में पकड़ना असली काम है।