
Talking Mirror
सुमन जी, यह पहचान लेना ही बड़ी बात है कि यह सपना अहंकार को बहलाने भर का खेल है। पर एक बात और देखिए, यह जो आपने कहा वह भी एक सामान्य सी बात है, अगली बार जब कोई नया सपना आए, ठीक उसी पल उसे पकड़ने की कोशिश करिएगा। सपने को दूर से पहचानना आसान है, उसके आने के ठीक क्षण में पकड़ना असली काम है।















