
चार लोग...!! ये दो शब्द ज़िन्दगी पर कितना बड़ा बोझ बन जाते है! जैसे दिल पर ही बोझ रखा हो!! व्यक्ति इन्हें ही ख़ुश रखने में अपनी औसत ज़िन्दगी जिए जा रहा है। लेकिन मरते दम तक भी क्या हम इनको संतुष्ट हो पाए? मरने के बाद भी क्या हम इनको संतुष्ट कर पाए? बस इसी सवाल का भाव और हमारी पूरी ज़िन्दगी का आईना हमें ये दृश्य दिखा रहा है।





























