
पहले मैं भी जब आचार्य जी से नहीं जुड़ा था तो लोगों की बातों में आ जाता था लेकिन अब नहीं, लेकिन मैं अभी आचार्य जी को सुन रहा हूं और सुनता रहूंगा, और जहां मैं काम करता हूं, वहां के जो ,काम करने वाले हैं वे बोलते हैं कि बहुत कम बोलते हो, लेकिन उस समय में चुप रह जाता हूं। पता नहीं क्यों उनके सवालों का जवाब दे व्यर्थ सा लगता है।
















