
मेरे जीवन में तो सीमाएं सचमुच में परिस्थितियों ने ही तय की हैं जैसे हम पांच बहनें हैं मुझे और मेरी दीदी को 12वीं तक ही पढ़ाया और हमारी शादी 18 साल में कर दी मेरी खेलकूद में काफी रुचि थी खेलने के लिए बाहर दूर के विद्यालय में जाना होता था तो, घर वाले लड़की जात है बोल के खेलने के लिए नहीं जाने देते। आगे पढ़ाई की इच्छा थी तो पढ़ाने की बजाय शादी कर दी न आर्थिक स्थिति सही न शिक्षा थी तो बंधी रह गई अपनी ही सीमाओं में न कुछ सीखने को मिला न कुछ जानने को।
















