
मान भी ले हम हर रोज ऐसा ना करें लेकिन किसी समारोह के आते ही Salon पहुंच जाना भी तो समाज के कुछ कहने के डर का ही कारण है
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मान भी ले हम हर रोज ऐसा ना करें लेकिन किसी समारोह के आते ही Salon पहुंच जाना भी तो समाज के कुछ कहने के डर का ही कारण है

ऋतु जी, सही पकड़ा। और गौर करने वाली बात ये है कि रोज़ वाला नियम तो आपने बना लिया, पर मौका आते ही वही डर पिछले दरवाज़े से लौट आता है। इससे पता चलता है कि फैसला सिर्फ आदत का नहीं था, वो डर कभी गया ही नहीं था, बस रोज़ के दबाव जितना घना नहीं था। समारोह उसे फिर से घना कर देता है। तो सवाल ये नहीं कि सैलून जाना है या नहीं, सवाल ये है कि जिस दिन कोई देखने वाला नहीं होगा, उस दिन भी क्या यही चुनाव होगा।

Society will always say the same thing 😉 Like, “You are looking cute” or “You are looking ugly.” 😵💫 If your ego depends on society, then you are the biggest beggar ever..😂 You are basically begging people to say something good about you.