ahankaar kiya kiya h mujhmey samajh ni paa rahi hu
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आचार्य जी के अनुसार, अहंकार (ईगो) का सीधा अर्थ है—'मैं' या खुद के बारे में एक झूठी कल्पना बना लेना। जब कोई व्यक्ति अपने बारे में सोचता है कि "मैं ऐसा हूँ, मैं वैसा हूँ" और बिना सच्चाई जाने उसे ही सच मान लेता है, तो वह भावना अहंकार कहलाती है। यह एक अधूरापन है जो खुद को शरीर और विचारों से जोड़कर पूर्णता पाना चाहता है।अहंकार के मुख्य लक्षणझूठी पहचान: खुद को किसी नाम, शरीर, या पद से जोड़कर देखना।कल्पना और धारणा: अपने बारे में बिना सोचे-समझे धारणाएं बना लेना और उनकी कभी जाँच न करना।दुख का कारण: झूठे 'मैं' को पालं-पोसकर बड़ा करना ही इंसान के सारे दुखों की जड़ है।अहंकार से मुक्ति कैसे पाएंआत्म-अवलोकन: अपने रोजमर्रा के विचारों, इच्छाओं और कामकाज में अहंकार के खेल को देखना शुरू करें।समझदारी: अहंकार को जबरन मिटाने के बजाय उसकी कार्यप्रणाली को समझें, जिससे वह अपने आप कम होने लगता है। साधारण शब्दों में ऐसे समझ सकते हैं जैसे मैं, आप या हमारी जैसी ही दूसरी महिलाएं हम सब शरीर से एक हैं लेकिन आप अलग घर में अलग जाति में है अलग माहौल में पली बढी है मेरा अलग है ऐसे ही दूसरों का भी अलग-अलग है तो उस अलग-अलग के कारण हमारे बीच में जो भेद होता है और हम ऐसे बोलते हैं कि मुझे यह पसंद है ,मैं ऐसी हूं, मेरे विचार ऐसे हैं, मुझे ऐसे भोजन में ज्यादा रस आता है, मैं यह करना ज्यादा पसंद करती हूं ,मैं सुंदर हूं ,मैं सुंदर नहीं हूं, मैं छोटी हूं, मैं बड़ी हूं तो इन सब में जो भेद कर रहा है वह मैं है लेकिन देखा जाए तो प्रकृति ने शारीरिक रूप से हम सबको एक समान बनाया है लेकिन जो हमारे अंदर भेद है वह मैं के कारण होता है उस को ही अहंकार बोलते हैं। हम पुरुषों से भी अलग नहीं है सिर्फ शारीरिक रूप से थोड़ा भेद होता है लेकिन प्रकृति ने हम सबको मनुष्य रूप में बनाया है बस सरंचना में भेद है। बाकी आप लगातार सत्र सुनती, रहे रिकॉर्डिंग सुने ,परीक्षा के लिए जो सत्रा है उसकी भी रिकॉर्डिंग सुने , परीक्षा दें और लगातार कम्युनिटी में संस्था की पोस्ट पढती रहे आपको धीरे-धीरे समझ में आने लगेगा। लेकिन जीवन में जितना सुधार और ऊंचाई हासिल होगी वह हमें सत्रों से ही मिलेगी अगर यहां जीवन बेहतर हो सकता है तो हो सकता है अन्यथा कहीं भी जीवन में सार्थकता नहीं आएगी और जीवन व्यर्थ ही चला जाएगा।