
❓ अगर किसी चित्र को समझने से पहले ही हम तय कर लेते हैं कि “सुंदर”, “सही” और “सामान्य” क्या है तो क्या हम सचमुच कला देख रहे हैं, या केवल अपनी ही धारणाओं को देख रहे हैं? हम कभी भी चित्र की वास्तविकता नहीं देखते हैं हम अक्सर अपनी बनाई हुई धारणा से ही उसे फिट करते हैं कि इसको ऐसा होना चाहिए यह सुंदर नहीं बना है।इसका रंग ऐसा होना चाहिए।
















