
क्योंकि हमे लगता है कि उसी से हमारी पहचान है । जैसे हम (अधिकतर महिलाएं) किसी की बेटी या पत्नी या मां के रूप में ही देखे जाते है ।अक्सर उनकी पहचान कहीं गुम हो जाती है एक परंपरा को परोसने के लिए । फिर ये परंपरा ही हमारे पतन का कारण बनती है । जिसके चलते हम भूल जाते है कि हम स्वयं कौन हैं इनके अतिरिक्त। और हम उस पहचान के साथ बना रहना भी चाहते हैं अंत तक।
















