
Saraswati Ekka
हमारे स्वार्थों को चोट पहुंचती है, इसी लिए हम किसी चीज को छोड़ नहीं पाते हैं, जब अहंकार स्वयं को ही नहीं जानता है तो उसके लिए कौन सी चीज मूल्यवान है यह कैसे तय करता है? हम अपनी छवि को बचाने के लिए ही चीजों को पकड़ना चाहते हैं और उसके टूटने या छूटने पर हमें चोट पहुंचती है।
















