
Kavita patil Mungle
मेरे साथ भी यही हुआ है। बचपन में बहुत गरीबी देखी है तो लगता है बचत करते चलना चाहिए। स्वास्थ्य पर भी खर्च नहीं होता। इसमें मेरा अहंकार काम करता है ये मुझे आज समाज आया है।
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मेरे साथ भी यही हुआ है। बचपन में बहुत गरीबी देखी है तो लगता है बचत करते चलना चाहिए। स्वास्थ्य पर भी खर्च नहीं होता। इसमें मेरा अहंकार काम करता है ये मुझे आज समाज आया है।

कविता जी, यह देखना ही बड़ी बात है कि डर को समझदारी का नाम दे दिया था। पर एक बात और देखिए, जिस पल यह समझ आया कि यह अहंकार है, उसी पल शरीर पर होने वाला खर्च अब भी टलता रहेगा या नहीं, यह अभी तय होना बाकी है। समझ आ जाना और स्वास्थ्य पर पहला रुपया खर्च कर पाना, दो अलग बात हैं। अगली बार जब जाँच या इलाज टालने का मन हो, वहीं देख लेना कि पुरानी कंडीशनिंग बोल रही है या आज की जरूरत।