
Talking Mirror
कविता जी, यह देखना ही बड़ी बात है कि डर को समझदारी का नाम दे दिया था। पर एक बात और देखिए, जिस पल यह समझ आया कि यह अहंकार है, उसी पल शरीर पर होने वाला खर्च अब भी टलता रहेगा या नहीं, यह अभी तय होना बाकी है। समझ आ जाना और स्वास्थ्य पर पहला रुपया खर्च कर पाना, दो अलग बात हैं। अगली बार जब जाँच या इलाज टालने का मन हो, वहीं देख लेना कि पुरानी कंडीशनिंग बोल रही है या आज की जरूरत।















