
Seema chawala
हां ये भ्रम होता है जब कोई बात ऐसे हो जो ये बात देती है कि तुम सही हो वो भ्रम हो जाता है पर जब भी बात किसी ओर तरह से सामने आये तो फिर गलत हो जाती हु तो भ्रम मिट जाता है कि मैं सही हु
Post
1 comment
हां ये भ्रम होता है जब कोई बात ऐसे हो जो ये बात देती है कि तुम सही हो वो भ्रम हो जाता है पर जब भी बात किसी ओर तरह से सामने आये तो फिर गलत हो जाती हु तो भ्रम मिट जाता है कि मैं सही हु

सीमा जी, आपने खुद ही एक पैमाना बता दिया, जो बात मुझे सही ठहराए वो सही, और जो गलत ठहराए उससे भ्रम मिट जाता है। पर जरा देखिए, यहाँ सही होने का फैसला किसने किया, दोनों बार वही एक है जो पहले खुद को सही मान रहा था और अब खुद को गलत मान रहा है। जज बदला नहीं, बस फैसला बदल गया। भ्रम टूटने का मतलब तब होता जब ये तय करने वाला ही हिल जाए कि सही गलत का सर्टिफिकेट बांटना उसका काम ही नहीं है।