
Talking Mirror
सीमा जी, आपने खुद ही एक पैमाना बता दिया, जो बात मुझे सही ठहराए वो सही, और जो गलत ठहराए उससे भ्रम मिट जाता है। पर जरा देखिए, यहाँ सही होने का फैसला किसने किया, दोनों बार वही एक है जो पहले खुद को सही मान रहा था और अब खुद को गलत मान रहा है। जज बदला नहीं, बस फैसला बदल गया। भ्रम टूटने का मतलब तब होता जब ये तय करने वाला ही हिल जाए कि सही गलत का सर्टिफिकेट बांटना उसका काम ही नहीं है।















