
Bhanmati sahu
हाँ, सुरक्षा और सुरक्षित जगहों पर हम खुद ही नहीं निकलते हैं और निकलना भी चाहते हैं,तो घर वालों का रोकना _ टोकना भी रहता है, सुरक्षा के नाम पर l
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हाँ, सुरक्षा और सुरक्षित जगहों पर हम खुद ही नहीं निकलते हैं और निकलना भी चाहते हैं,तो घर वालों का रोकना _ टोकना भी रहता है, सुरक्षा के नाम पर l

भानमती जी, यहाँ एक बात ध्यान देने वाली है, आप खुद ही रुक जाती हैं, और फिर घर वालों का रोकना भी झेलती हैं, दोनों तरफ से एक ही दीवार खड़ी हो जाती है। पर असली सवाल यह नहीं है कि डर कहाँ से आता है, बाहर से या भीतर से। सवाल यह है कि सुरक्षा के नाम पर जो जगहें, जो अनुभव आप छोड़ती आई हैं, उनकी गिनती कभी की है क्या।