
Parmar Kalpana
मैंने भी एक मान्यता मान रखी थी किसी के सामने खुद की तारीफ नहीं करनी चाहिए या किसी की नजर लग जाएगी। मेरी अक्सर ऐसा ही करतीथी। मुझे कुछ भी हो जाता था तो मैं हमेशा उस सब का दोष दूसरों पर डाल देति थी कि किसी की नजर लग गई। यह सारी मान्यता आचार्य जी को सुनने के बाद ही टूटी है
















