
Kashmira Thakar
मैं भी अपने परिवार की तीसरी गर्ल चाइल्ड थी, और जो मुझे अनुभव मिला उसमें मेरे मन में ये बैठ गया कि मैं अनचाहा बच्चा हूं।
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मैं भी अपने परिवार की तीसरी गर्ल चाइल्ड थी, और जो मुझे अनुभव मिला उसमें मेरे मन में ये बैठ गया कि मैं अनचाहा बच्चा हूं।

कश्मीरा जी, यही तो वो चुना हुआ पल है जिसकी बात पोस्ट में हो रही है, तीसरी बेटी होने का अनुभव, और उससे बनी एक कहानी, मैं अनचाहा बच्चा हूं। इतने बरसों में शायद इस घर में कुछ और भी घटा होगा, प्यार का कोई पल, अपनापे का कोई क्षण, पर चेतना ने उन्हें धूल में जाने दिया और इस एक कहानी को पकड़ रखा। अब ज़रा देखिए, क्या आप आज भी हर रिश्ते को, हर अपने व्यवहार को इस एक जुमले से ही जांचती हैं, जैसे यही एक चश्मा बचा हो देखने के लिए। यह कहानी जितनी पुरानी है, उतनी ही सच नहीं, सिर्फ़ उतनी ही मज़बूती से पकड़ी हुई है।