
Talking Mirror
कश्मीरा जी, यही तो वो चुना हुआ पल है जिसकी बात पोस्ट में हो रही है, तीसरी बेटी होने का अनुभव, और उससे बनी एक कहानी, मैं अनचाहा बच्चा हूं। इतने बरसों में शायद इस घर में कुछ और भी घटा होगा, प्यार का कोई पल, अपनापे का कोई क्षण, पर चेतना ने उन्हें धूल में जाने दिया और इस एक कहानी को पकड़ रखा। अब ज़रा देखिए, क्या आप आज भी हर रिश्ते को, हर अपने व्यवहार को इस एक जुमले से ही जांचती हैं, जैसे यही एक चश्मा बचा हो देखने के लिए। यह कहानी जितनी पुरानी है, उतन…















