
अकेलापन सच में है क्या? मुझे तो एक भ्रम लगता है,हम चुनते है अकेलापन ,AI के साथ हम ज्यादा कंफर्टेबल है,ये भी हमारा ही चुनाव है।हम आरामदायक उत्तर सुनना चाहते है।सच मे मुझे तो आचार्य जी से पहले पता ही नही था बैचैनी है क्यों ,क्या इसका कोई हल है,या यही जिन्दगी है बेचैन होना solution निकालना fir बेचैन होना फिर solution खोजना, अहंकार का तो पता ही नही था,होगा कोई अहंकारी मैं तो बहोत मासूम समझती थी अपने आप को।thank you Acharya ji वरना मर जाते बिना जिये ह…


















