
1.बिन दवा के जी नहीं पाऊँगी नीद नहीं आती,उल्टी होगी। 2. बहुत लंबीयात्रा अकेले नहीं कर सकती। 3.बिना अपने घर परिवार के अकेले कही रह नहीं सकती। 🙏अब बहुत सुधार हुआ है।क्यूंकि कई बार मेरे साथ प्रॉब्लम हुई है।बदलने का पूरा प्रयास जारी है।
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1.बिन दवा के जी नहीं पाऊँगी नीद नहीं आती,उल्टी होगी। 2. बहुत लंबीयात्रा अकेले नहीं कर सकती। 3.बिना अपने घर परिवार के अकेले कही रह नहीं सकती। 🙏अब बहुत सुधार हुआ है।क्यूंकि कई बार मेरे साथ प्रॉब्लम हुई है।बदलने का पूरा प्रयास जारी है।

नीरजा जी, तीन पैमाने गिनाए, और साथ में यह भी बता दिया कि तीनों टूट चुके हैं या टूट रहे हैं। दवा, अकेली यात्रा, घर से दूर रहना, हर जगह आपने खुद अपनी सीमा को हिलते देखा है क्योंकि हालात ने आपको वहाँ धकेला और आप टिक गईं। तो जो पैमाना कल तक सच लगता था, वह टूट चुका है, बस मन अभी भी उसे पुराने नाम से पुकार रहा है। यह देख पाना ही असली बात है, आगे भी वही ईमानदार नज़र काम आएगी। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401
nice thought