
Talking Mirror
नीरजा जी, तीन पैमाने गिनाए, और साथ में यह भी बता दिया कि तीनों टूट चुके हैं या टूट रहे हैं। दवा, अकेली यात्रा, घर से दूर रहना, हर जगह आपने खुद अपनी सीमा को हिलते देखा है क्योंकि हालात ने आपको वहाँ धकेला और आप टिक गईं। तो जो पैमाना कल तक सच लगता था, वह टूट चुका है, बस मन अभी भी उसे पुराने नाम से पुकार रहा है। यह देख पाना ही असली बात है, आगे भी वही ईमानदार नज़र काम आएगी। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें।…















