
मैं देख रहा हूं एक मंदिर है और मंदिर के बाहर बहुत सारे मांगने वाले बैठे है और ये जो भगवान के दर्शन कर बाहर आतें है ये लोग बच्चों के हाथों कुछ देते है पैसा हो या कुच भी खाने का सामान मेरे समझ मै नहीं आ रहा अपने बच्चों के हाथ क्यों देते है क्यों अपने हाथों से क्यों नहीं देते ये कैसी परंपरा या मान्यता है जो खुद तो अज्ञान है और बच्चों को भी अज्ञान बना रहे है
















