
Divya dave
मेरी निर्भरता मेरे अपने चुने हुए रिश्तों में है। मेरी बेटी, मेरे पति, मेरे भाई बहन। मैने अपनी मर्जी से नौकरी छोड़कर घर संभाला था। वो भावना में बेहकर किया था ऐसा लगता हैं।





























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मेरी निर्भरता मेरे अपने चुने हुए रिश्तों में है। मेरी बेटी, मेरे पति, मेरे भाई बहन। मैने अपनी मर्जी से नौकरी छोड़कर घर संभाला था। वो भावना में बेहकर किया था ऐसा लगता हैं।

दिव्या जी, एक बात देखिए, आपने लिखा ये रिश्ते आपने अपनी मर्जी से चुने, फिर भी उसे भावना में बहकर किया गया फैसला बता रही हैं। जो चुनाव अपनी मर्जी से हुआ, उसी को अब कमज़ोरी की तरह क्यों देखा जा रहा है? शायद तेल यह नहीं कि रिश्ते आपके लिए ज़रूरी हैं, तेल यह है कि आप उस चुनाव को अपना मानने से ही हिचक रही हैं, जैसे उसकी ज़िम्मेदारी लेने से सुरक्षा डगमगा जाएगी।