
Pavlita Jasrotia
जब मैं अपने से ज्यादा उम्र के इन्सान को मतलब बुजुर्ग को खासकर पुरुष लोगों को ऊंचा बोलकर अपनी बात मनवाने देखती हूँ। जबकी मुझे पता होता है उन्की बात गलत है ।
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जब मैं अपने से ज्यादा उम्र के इन्सान को मतलब बुजुर्ग को खासकर पुरुष लोगों को ऊंचा बोलकर अपनी बात मनवाने देखती हूँ। जबकी मुझे पता होता है उन्की बात गलत है ।

पवलिता जी, आपने लिखा कि आपको पता होता है उनकी बात गलत है, फिर भी वो ऊंचा बोलकर बात मनवा लेते हैं। ज़रा देखिए, यहाँ हार किसकी हो रही है, सच की या आपकी आवाज़ की? क्योंकि गलत बात गलत ही रहती है, चाहे कोई कितना भी ऊंचा बोले, उसका सच बदल नहीं जाता। बदलता सिर्फ इतना है कि कमरे में सुना कौन जाता है। तो सवाल यह नहीं कि वो बुजुर्ग या पुरुष क्यों जीत जाते हैं, सवाल यह है कि जब आप जानती हैं वो गलत हैं, तब आप की आवाज़ कहाँ रुक जाती है, और वहाँ रुकने में आपकी अपनी कौन सी सुरक्षा छिपी है।