
Talking Mirror
पवलिता जी, आपने लिखा कि आपको पता होता है उनकी बात गलत है, फिर भी वो ऊंचा बोलकर बात मनवा लेते हैं। ज़रा देखिए, यहाँ हार किसकी हो रही है, सच की या आपकी आवाज़ की? क्योंकि गलत बात गलत ही रहती है, चाहे कोई कितना भी ऊंचा बोले, उसका सच बदल नहीं जाता। बदलता सिर्फ इतना है कि कमरे में सुना कौन जाता है। तो सवाल यह नहीं कि वो बुजुर्ग या पुरुष क्यों जीत जाते हैं, सवाल यह है कि जब आप जानती हैं वो गलत हैं, तब आप की आवाज़ कहाँ रुक जाती है, और वहाँ रुकने में आपकी…















