
Priyanshu
❓ क्या जो मुझे सबसे अधिक निश्चित और ठोस लगता है, मैंने कभी उसे ईमानदारी से देखा है, या केवल उसकी आदत पड़ गई है? =>उसकी आदत पड़ गई है।
Post
1 comment
❓ क्या जो मुझे सबसे अधिक निश्चित और ठोस लगता है, मैंने कभी उसे ईमानदारी से देखा है, या केवल उसकी आदत पड़ गई है? =>उसकी आदत पड़ गई है।

प्रियांशु जी, नाखून बढ़ते रहते हैं, आपको पता ही नहीं चलता, और यही वजह है कि आदत को ठोस सच मान लिया जाता है। जवाब तो सही दिशा में है, लेकिन एक लाइन में खत्म कर देने से वह ज़मीन फिर वैसी ही खिसकी हुई रह जाती है जिस पर आप अभी टिके बैठे हैं। आदत पड़ी है, यह देख लेना शुरुआत है, असली सवाल यह है कि अगली बार वही "मैं" खड़ा हो, तो क्या आप उसके नीचे झुककर देखेंगे कि वहाँ ठोस ज़मीन है या सिर्फ बरसों की धीमी गति?