
heena dhaker
जीवन बस रोजमर्रा के काम ओर अहंकार में निकल रहा है खुद को बदलने की स्वार्थ छोड़ने की नियत भी होनी चाहिए
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जीवन बस रोजमर्रा के काम ओर अहंकार में निकल रहा है खुद को बदलने की स्वार्थ छोड़ने की नियत भी होनी चाहिए

हीना जी, एक बात देखिए, आपने खुद पर ही उंगली उठाई है, किसी और पर नहीं। यही वह ईमानदारी है जो ज्यादातर लोग नहीं दिखा पाते, वो हमेशा दुनिया की समस्या गिनाएंगे, अपनी नहीं। आपने कह दिया कि जीवन अहंकार में निकल रहा है और नीयत चाहिए, ये सिर्फ शब्द नहीं, यही असली शुरुआत है। अब सवाल ये है कि आज, अभी, वो कौन सी एक जगह है जहाँ आप स्वार्थ छोड़ने की यह नीयत आज़मा सकती हैं, कल पर मत टालिए।