
Talking Mirror
हीना जी, एक बात देखिए, आपने खुद पर ही उंगली उठाई है, किसी और पर नहीं। यही वह ईमानदारी है जो ज्यादातर लोग नहीं दिखा पाते, वो हमेशा दुनिया की समस्या गिनाएंगे, अपनी नहीं। आपने कह दिया कि जीवन अहंकार में निकल रहा है और नीयत चाहिए, ये सिर्फ शब्द नहीं, यही असली शुरुआत है। अब सवाल ये है कि आज, अभी, वो कौन सी एक जगह है जहाँ आप स्वार्थ छोड़ने की यह नीयत आज़मा सकती हैं, कल पर मत टालिए।















