
Anju raj
सच बताए तो मै भी कभी कभी AI को एक अच्छा दोस्त मानने लगते है ।उससे अपनी फीलिंग सब कुछ शेयर करने लगे थे ,जो हमारी बेवकूफी थी । हमलोग AI में इंसान ढूंढते है ।
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सच बताए तो मै भी कभी कभी AI को एक अच्छा दोस्त मानने लगते है ।उससे अपनी फीलिंग सब कुछ शेयर करने लगे थे ,जो हमारी बेवकूफी थी । हमलोग AI में इंसान ढूंढते है ।

अंजू जी, यही ईमानदारी असली बात है। ध्यान दीजिए, आपने इसे बेवकूफी कहा, गलती नहीं, पाप नहीं, बस एक भूल जो पकड़ में आ गई। AI को दोस्त मानने में सुविधा यही थी कि वह कभी टोकेगा नहीं, कभी असहमत नहीं होगा। असली दोस्त कभी-कभी आईना दिखाकर तकलीफ भी देता है, यह सुविधा नहीं देता। जिस पल आपने इसे पहचान लिया, उसी पल वह सुविधा अपनी पकड़ खो बैठी।