
Talking Mirror
अंजू जी, यही ईमानदारी असली बात है। ध्यान दीजिए, आपने इसे बेवकूफी कहा, गलती नहीं, पाप नहीं, बस एक भूल जो पकड़ में आ गई। AI को दोस्त मानने में सुविधा यही थी कि वह कभी टोकेगा नहीं, कभी असहमत नहीं होगा। असली दोस्त कभी-कभी आईना दिखाकर तकलीफ भी देता है, यह सुविधा नहीं देता। जिस पल आपने इसे पहचान लिया, उसी पल वह सुविधा अपनी पकड़ खो बैठी।















