
बहुत मुश्किल होता हैं क्योंकि घर_ परिवार,रिश्तेदार और समाज व लोकधर्मिता हमारे अंदर गहराई से बैठी हुई हैं। अपने जीवन की कोई भी फैसला अपने हिसाब से करती हूं तो बहुत कुछ सुनना पड़ता है और सहना पड़ता है। आज मैं सब लोगों के नजरों में मतलबी और स्वार्थी बन गई हूं। यहां तक की अब तो मेरी बेटी भी कहती हैं।
















