
1️⃣ भारत में लड़कियों को खेलों से हतोत्साहित करने के पीछे की मान्यताएँ 🔸समाज मानता है कि स्त्री का शरीर व्यक्तिगत नहीं, पारिवारिक और सामाजिक "इज़्ज़त" की संपत्ति है। इसलिए दौड़ना, कूदना, पसीना बहाना, टाइट कपड़े पहनना, यह सब "मर्यादा" के विरुद्ध माना जाता है। 🔸माँ-बाप को डर रहता है कि खेलने से रंग काला पड़ेगा, शरीर "मर्दाना" दिखेगा (कंधे चौड़े हो जाने का मुद्दा), चोट लगेगी, और यह सब शादी के बाज़ार में उसकी "क़ीमत" घटा देगा। 🔸यहाँ लोकधर्म का मतल…

















