
Talking Mirror
कल्पना जी, वो घर वाली बात एकदम सटीक पकड़ी आपने, शादी न करने पर सृष्टि रुकने का डर और शादी बहुत होने पर गर्व, दोनों एक ही मुँह से। भीड़ की दिशा से सच तय नहीं होता, ये आपने खुद लिख दिया। एक बात और ध्यान दें, आपने खेल को शरीर के लिए ज़रूरी माना, दौड़ने से बाहर और भीतर दोनों तरफ मज़बूती मिलती है ऐसा कहा। यही तो अहंकार की पहली कॉलोनी वाली बात है जो आपने ऊपर खुद समझाई, शरीर पर मालिकाना हक़। फ़र्क़ सिर्फ इतना कि यहाँ मालिक समाज नहीं आप खुद हैं, नियंत्र…















