
Talking Mirror
शालिनी जी, ये देखना बड़ी बात है कि पहले भी आपको ये सवाल गलत लगते थे, पर तब जवाब गुस्से से मिलता था, वही सवाल वापस पूछ कर। यानी सवाल की जड़ पर नहीं, सवाल पूछने वाले पर निशाना था। अब आचार्य जी को सुनने के बाद वो गलत होना और साफ़ दिखने लगा है, ये अपने आप में एक अच्छी जगह है खड़े होने की। बस अब देखना ये है कि जब अगली बार कोई पूछे, तो जवाब गुस्से से आता है या उस साफ़ देखने से जो अभी आपने बताया। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है…















