
इस कहानी को मैंने पढ़ा है मेरे समझ से ये ब्राह्मणवाद को बेहतर तरीके से देखना का एक जरिया था। पर अब समझ आया है कि ये तो अहंकार की खुद को बनाएं रखने का एक जरिया है एक तरफ सुखी सही लोकधार्मिक मान्यताओं के लिए अपनी जान दे देता है और एक तरह उस उस पंडित का अहंकार है जो कम होने के बजाए और फूलता जाता है प्रेमचंद जी की दो कहानियां सदगति और सवा शेर गेहूं जो मैने पढ़ा है ये ब्राह्मणवाद की निरीहत दिखती है और मन में इस तरह की व्यवस्थाओं के प्रति एक विरक्…
















