
मैने अक्सर लोगों को ओर खुदको ये बोलते हुए देखा हे । 1. में तो गरीब हु , में क्या करूं ? 2. हम तो मजदूर लोग हे , इसीलिए मजदूरी ही करनी पड़ेगी । 3.में तो फिजिकली डिसेबल हु , में कुछ कर नहीं सकता । " में ये हु , इसीलिए ये ऐसा हे " आजतक तो मैने अपनी सीमा को अपनी पहचान माना हे ।
















