
Ashwani Kumar
बस पैसा और पैसा । हम जी हु क्यों रहे नहीं पूछते ?
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बस पैसा और पैसा । हम जी हु क्यों रहे नहीं पूछते ?

अश्वनी जी, यही तो सवाल है, पैसा और पैसा के पीछे क्यों हैं हम, यह पूछा नहीं। पर गौर कीजिए, यह शिकायत भी किसी और की तरफ ही इशारा कर रही है, शहरों की तरफ, व्यवस्था की तरफ। अपने ही भीतर झाँककर पूछा, कितनी बार आपने खुद यह तय किया कि आज कमाई नहीं, जीना देखना है? सवाल बाहर उछालना आसान है, अपने ही रोज़ के फ़ैसलों में इसे उतारना असली काम है।