
मैं कुछ दिनों से मुंबई में हूँ और इस शहर को समझने की कोशिश कर रही हूँ क्योंकि आने वाले कुछ वर्षों में मुझे काफ़ी बार आना पड़ेगा और नहीं चाहते हुए भी कहीं-कहीं निकल जाती हूँ कभी पैदल और कभी किसी सवारी से की देखूँ थोड़ा और समझूँ थोड़ा पर ये घमंड की मैं बहुत घूमी हूँ बहुत कुछ जानती हूँ सब टूट गया भ्रम और मेरे बस की बात नहीं है इस शहर को समझना।
















