
❓ हम अपने समय की किन मान्यताओं को केवल इसलिए ढो रहे हैं क्योंकि उन्हें चुनौती देने के लिए हमारे भीतर उतनी ही ईमानदार नीयत और साहस नहीं है? ...कोई भी धार्मिक काम हो सबसे पहले मिठाई बनेगी उसे मिठाई से चाहे लोगों को जितनी भी बीमारियाँ होती हैं तब भी वाह बनेगी और बोलेगी भी... पहला हिसा दान के लिए निकला जाएगा जो कि तथाकथित पंडित को दिया जाता है. हर त्यौहार में नए कपडे पहनना जरूरी है ,त्यौहार का व्यापक मतलब क्या है उसे लोग धार्मिक लोगों का कोई लेना देन…
















