
जिस रूप को पाने के लिए मैं बेचैन हूं उसे सच में पाना चाहती हूं।पर वह रूप देह से सम्बंधित नहीं, बल्कि बोध से है। मैं उसी रुप को सुन्दर कहूंगी जिसमें मेरा स्वाभिमान हो। मैं ऐसे किसी रूप को अपने जीवन में अब नहीं लाना चाहती जो ,दूसरों के लिए आकर्षक का केन्द्र हो।
















