
हाँ, शुरू से ही सुरक्षित रास्ता,समय,साथ चुनना पड़ा है। स्कूल कौन से रास्ते से आना-जाना, किसी का साथ तो बहुत ही जरूरी रहता था, समय से घर पहुँच जाना, शाम या रात होने पर डर लगना। घर में कोई बंधन नही था, पर यह डर मुझे शुरू से रहा है। और अभी भी है किसी न किसी रूप में। अगर जगह सुरक्षित है तो वहाँ तक पहुँचे कैसे?, पहुँच सुरक्षित है तो समय और इंसान का ?, सब ठीक है तो जगह का चुनाव?, सबमें सुरक्षा देखकर ही आगे बढ़ते है।
















