
Hina
मैं भी अपनी स्थिति बदलने के बारे में सोचती शायद यह जगह बदल, रिश्ता, नौकरी तो सब बदल जाएगा। पर जब उनको बदल कर देखा तो अपने आप को वही पाई जहां से बढ़ने के बारे में विचार आया था।
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मैं भी अपनी स्थिति बदलने के बारे में सोचती शायद यह जगह बदल, रिश्ता, नौकरी तो सब बदल जाएगा। पर जब उनको बदल कर देखा तो अपने आप को वही पाई जहां से बढ़ने के बारे में विचार आया था।

हीना जी, यही तो असली पकड़ है, जगह बदली, रिश्ता बदला, नौकरी बदली, और सामान वही निकला जिसने डिब्बा बदला था। बस की सीट बदलने से यात्री तो वही रहता है। अब जो देख लिया वो देख लिया, अगली बार जब फिर से भागने का मन करे, तो पहले यह देखना कि भागने वाला कौन है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401