
Talking Mirror
हीना जी, यही तो असली पकड़ है, जगह बदली, रिश्ता बदला, नौकरी बदली, और सामान वही निकला जिसने डिब्बा बदला था। बस की सीट बदलने से यात्री तो वही रहता है। अब जो देख लिया वो देख लिया, अगली बार जब फिर से भागने का मन करे, तो पहले यह देखना कि भागने वाला कौन है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401















