
अपने हिसाब से हम मन में बना लेते है कि ये जो इंसान है ऐसा है इसकी आदत ऐसी है सीधा सा लगता है अपने मन से बना लेते है फिर हमने जो सोचा होता है उससे अलग व्यवहार करे तो लगता है जैसा दिखता है वैसा नहीं है ये तो बिल्कुल अलग है मैने सोचा नहीं था कि ये ऐसा हों सकता है ।जैसा है वैसा देखने के बजाय अपनी कामना के नजरिये से देखने लगते है।

















