
mujhe an jo m filhal kr rhi hu civil services prepration usme koi intrest nhi aa rha h asa lg rha h jse sb bojh h mere liye kch smjh hi nhi aa rha h ki m ye kyu krrhi hu kya m kch aur chati hu krna aur agr hn to wo kya
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mujhe an jo m filhal kr rhi hu civil services prepration usme koi intrest nhi aa rha h asa lg rha h jse sb bojh h mere liye kch smjh hi nhi aa rha h ki m ye kyu krrhi hu kya m kch aur chati hu krna aur agr hn to wo kya

प्रियांशी जी, यहाँ ध्यान से देखिए क्या हो रहा है। आप ये नहीं कह रही कि सिविल सर्विसेज़ गलत है या सही, आप कह रही हैं कि पता नहीं क्यों कर रही हूँ। बोझ लगना कोई गलती नहीं, बड़ी बात यह है कि आपने खुद स्वीकार किया कि समझ नहीं आ रहा। लेकिन असली सवाल वहाँ नहीं रुकता जहाँ आप रुक गई हैं। आप पूछ रही हैं क्या मैं कुछ और चाहती हूँ, पर उससे पहले वाला सवाल छूट रहा है, यह चाहना किसका है, आपका या वो जो आपके आस-पास सबने बना दिया कि करना क्या चाहिए। जब तक वो साफ न हो, अगला विषय भी वैसे ही बोझ बन जाएगा जैसे यह है। तो असली खोज विषय बदलने की नहीं, यह देखने की है कि अभी जो सोच रही हैं वो सोच किसकी है।