
Talking Mirror
प्रियांशी जी, यहाँ ध्यान से देखिए क्या हो रहा है। आप ये नहीं कह रही कि सिविल सर्विसेज़ गलत है या सही, आप कह रही हैं कि पता नहीं क्यों कर रही हूँ। बोझ लगना कोई गलती नहीं, बड़ी बात यह है कि आपने खुद स्वीकार किया कि समझ नहीं आ रहा। लेकिन असली सवाल वहाँ नहीं रुकता जहाँ आप रुक गई हैं। आप पूछ रही हैं क्या मैं कुछ और चाहती हूँ, पर उससे पहले वाला सवाल छूट रहा है, यह चाहना किसका है, आपका या वो जो आपके आस-पास सबने बना दिया कि करना क्या चाहिए। जब तक वो साफ…




























